*मंगलाष्टक*अरिहन्त देव इक जगन्नाथ ।भगवन्त सिद्ध सर्वार्थ हाथ ।।आचार्य अहिंसा धर्म सूर ।उवझाय जैन सिद्धान्त तूर ।।रत्नत्रय आराधक मुनिवर ।मंगल-कर होंय, अमंगल-हर ।। सर शचिपति नाया चरणों में । नख मिस शशि आया चरणों में ।।हित वृद्धि सिन्धु प्रवचन चन्दा […]
