परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचित पूजन क्रंमाक 299 ==हाईकू==सुना, चन्दन पाँव पखारे, हम भी तो तुम्हारे ।।स्थापना ।। भेंटूँ जल,‘कि मेंट सकूँ वानरी गहल ।।जलं।। भेंटूँ चन्दन,‘कि मगरमच्छ सा मेंटूँ रुदन ।।चन्दनं।। भेंटूँ धाँ,चालूँ ‘कि गिरगिट सा न […]
