परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 339 *हाईकू* पड़गाहन ‘आप’ आँगन चाहता,क्या ‘दे-बता’ रास्ता ।।स्थापना।। दे दे तालियाँ,‘करूँ मैं समर्पित’ जल झारियाँ ।।जलं।। दे दे तालियाँ,‘करूँ मैं समर्पित’ गंध प्यालियाँ ।।चन्दनं।। दे दे तालियाँ,‘करूँ मैं समर्पित’ धाँ […]
