परम पूज्य मुनि श्री निराकुल सागरजी द्वारा रचितपूजन क्रंमाक 359 =हाईकू=तरु को किया सफल,दृग् अभी भी मेरे सजल ।।स्थापना।। झिरी चाँद से,वो सुधा लाये,तुम्हें मनाने आये ।।जलं।। उसी में घोर,चन्दन लाये,तुम्हें मनाने आये ।।चन्दनं।। उसी से सराबोर,धाँ लाये,तुम्हें मनाने आये […]
